बेचैन कण्डियाल जी एक प्रसिद्ध हिंदी कवि और लेखक हैं। उनकी कविताएँ और साहित्यिक रचनाएँ समाज के विभिन्न पहलुओं पर गहराई से प्रकाश डालती हैं। वे अपनी भावनात्मक और सशक्त रचनाओं के लिए जाने जाते हैं, जो पाठकों के दिलों को छू लेती हैं। हिंदी साहित्य में उनका योगदान उल्लेखनीय है और उन्हें कई साहित्यिक मंचों पर सम्मानित किया गया है।


लेखन एवं पत्रकारिता
डॉ. बेचैन कण्डियाल को कविता और कहानी लिखने का शौक उन्हें बचपन से ही था। इंटर कक्षा के पश्चात अखबारों और पत्र पत्रिकाओं में उनक लेख, कविता और कहानी छपने लगी थी। स्नातकोत्तर पढ़ाई के साथ ही उन्होंने पत्रकारिता भी शुरु कर दी थी। दैनिक दून दर्पण, गढ़ एना, समृद्ध भारत, पौड़ी टाइम्स, हिमालय दर्पण, दैनिक जागरण आदि दैनिक और साप्ताहिक अखबारों में उन्होंने पत्रकारिता की।
बेचैन कण्डियाल एक समर्थ लेखक एवं अच्छे कवि भी है। जनपक्षीय मुद्दों पर वे अपने लेखन में मुखरता के साथ अपना पक्ष रखते हैं तो वहीं दूसरी ओर अपनी कविताओं से और लेखों में सामाजिक मुद्दों और मानवीय भावनाओं को व्यक्त करते हैं। उनकी रचनाएँ अक्सर प्रेम, जीवन, और समाज के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित होती हैं।
बेचैन कण्डियाल की कविताओं में एक विशेष बात यह है कि वे अपने शब्दों के माध्यम से पाठकों को एक नए दृष्टिकोण से देखने और सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी कविताएँ अक्सर गहरे अर्थ और भावनाओं से भरी होती हैं, जो पाठकों को अपने जीवन के बारे में सोचने और अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए प्रेरित करती हैं।
बेचैन कण्डियाल की कुछ प्रसिद्ध पुस्तकें इस प्रकार हैं:
1- टूटे हुए तार (क्षणिका संग्रह)
2- शब्दों के जंगल में (कविता संग्रह)
3- पतझड़ के साये (कविता संग्रह)
4- जी रहा हूं मैं (मुक्तक संग्रह)
5- राग जिंदगी का (ग़ज़ल संग्रह)
6- दहकते हुए सवाल (विद्रोही गीत)
7- रीति हथगुल्यूं मा चुसण्या (गढ़वाली क्षणिका संग्रह)
8- हुजूम-ए-गम (ग़ज़ल संग्रह)
बेचैन कण्डियाल द्वारा संपादित पुस्तकें:
बेचैन कण्डियाल द्वारा भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' के कृतित्व, व्यक्तित्व एवं राजनैतिक उपलब्धियों पर अनेक पुस्तकों का लेखन एवं संपादन किया गया है। इनमें कुछ महत्वपूर्ण पुस्तक कि इस प्रकार हैं-
1- हिमवंत का राष्ट्रीय कवि डॉ. निशंक (समीक्षा ग्रंथ)
2- साहित्य, संस्कृति और राजनीति की त्रिवेणी: डॉ. निशंक (समीक्षा ग्रंथ)
3- उत्तर प्रदेश विधानसभा में डॉ. निशंक
4- उत्तराखंड राज्य निर्माण में डॉ. निशंक की भूमिका
5- उत्तराखंड विधानसभा में डॉ. निशंक
6- मेरा उत्तराखंड: योजनाएं एवं आवश्यकताएं
7- मेरे सपनों का उत्तराखंड
8- 16वीं लोकसभा में डॉ. निशंक (चार भागों में)
9- संसद में डॉ.निशंक के श्रेष्ठ भाषण
10- संसद में हिमालय
11- शिक्षा मंत्री के रूप में डॉ. निशंक
सम्पादक के रूप में:
वर्ष 1987 में इंजीनियरिंग करने के पश्चात एक वर्ष उन्होंने नई टिहरी में निर्माणाधीन डाम में एक प्रतिष्ठित कंपनी में जूनियर इंजीनियर के रूप में कार्य किया, किंतु नौकरी में उनका मन नहीं लगा। फलस्वरुप वे पौड़ी आ गए। वर्ष 1988 में मंडल मुख्यालय पौड़ी में आकर उन्होंने फिर पत्रकारिता की शुरुआत की। मंडल मुख्यालय पौड़ी से निकलने वाले 'दैनिक सीमांत वार्ता' पत्र के वे सम्पादक बने। उन्होंने 10 वर्ष तक इसका संपादन किया।
उत्तराखंड से निकलने वाली पहली शोध पत्रिका 'नयी राह, नई चेतना' का भी उन्होंने तीन वर्षो तक संपादन किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने उत्तराखंड स्वास्थ्य महानिदेशालय की स्वास्थ्य पत्रिका 'आयुष्मान' का तीन वर्षो तक संपादन किया।
